(क) स्टाम्प पत्रों के प्रकार:स्टाम्प पत्र मुख्यतः दो प्रकार के होते हैंः (देखें नियम
55 उ0प्र0 स्टाम्प स्टाम्प नियमावली,1942 )
1- गैर न्यायिक अथवा सामान्य स्टाम्प (जो विलेखो पर प्रयुक्त होते हैं)
2- न्यायिक या कोर्ट फीस स्टाम्प (जसे न्याया लयों में प्रयुक्त होते है)
उपरोक्त दोनों प्रकार के स्टाम्पों के दो रूप होते हैंः-
(i) छापित स्टाम्प (इम्प्रेस्ड स्टाम्प)
(ii) चिपकाऊ स्ठाम्प (एडहेसिव स्टाम्प)
जिनमें रसीदी टिकट, कापी स्टाम्प, नाटोरियल स्टाम्प, हुन्डी स्टाम्प, स्पेशल
एडहेसिव (चिपकाऊ) स्टाम्प, शेयर ट्रांसफर स्टाम्प, कोर्टफीस स्टाम्प, इण्डिया इंश्योरेन्स
पालिसी स्टाम्प, गवर्नमेन्ट आफ इण्डिया इंश्योरेन्स स्टाम्प, इण्डिया फोरेन बिल स्टाम्प आदि
सम्मिलित हैं।
पूर्व से प्रचलित मूल छापित स्टाम्पों पर अंकित पहचान के चिन्ह अध्याय-10 के
परिशिष्ट-5 में अंकित हैं ।
(ख) प्रमाणपत्र के रूप में नकद जमा धनराशि के स्थान पर दिया जाने वाला
स्टाम्प-
भारतीय स्टाम्प अधिनियम की धारा-10 ए के अन्तर्गत यह प्रावधान है कि जनपद में
स्टाम्पों की कमी होने पर कलेक्टर यह आदेश दे सकता है कि पक्षकार से नकद धनराशि
कोषागार में जमा कराकर उसे एक निश्चित प्रारूप पर स्टाम्प पेपर के स्थान पर उपयोग
करने हेतु कोषाधिकारी द्वारा प्रमाण-पत्र निर्गत किये जायें।
(ग) इम्प्रेस्ड अथवा एम्बौसिंग द्वारा स्टाम्प-
स्ठाम्प अनुभाग राजस्व परिषद इलाहाबाद के अतिरिक्त चुने हुए जनपदों में
स्थित कोषागार के माध्यम से गैर न्यायिक स्टाम्प के रूप में आवश्यकतानुसार प्रिन्टेड
फार्म आदि के ऊपर मशीन द्वारा इम्प्रेस अथवा एम्बौसिंग करके भी स्टाम्प का प्रयोग
किया जाता है।
स्टाम्प और उनके प्रयोग करने की विधि भारतीय स्टाम्प अधिनियम 1899 की
धारा 10 से 16 तक विस्तार से वर्णित है।
(घ) कोषागार में स्टाम्प आपूर्ति हेतु व्यवस्था-नोडल बिन्दु-
सभी प्रकार के स्टाम्प-पत्रों की छपाई एवं आपूर्ति का कार्य केन्द्रीय मुद्रांक डिपों
नासिक रोड तथा उसकी शाखा हैदराबाद में किया जाता है। प्रद ेश से प्राप्त त्रैमासिक मांग
के आधार पर स्टाम्प पत्रों को कानपुर नगर के कोषाागार के सम्बन्धित अधिकारी
गण को व्यक्तिगत रूप से प्राप्त कराया जाते हैं जिसे सड़क मार्ग द्वारा पुलिस अभिरक्षा में
कानपुर नगर कोषागार तक लाया जाता है। वर्तमान में प्रदेश के कानपुर नगर
कोषागार से स्टाम्प की आपूर्ति हेतु दस नोडल जनपदों इलाहाबाद, झांसी, आगरा, मेरठ,
मुरादाबाद, बरेली, लखनऊ, फैजाबाद, वाराणसी तथा गोरखपुर के कोषागारों को आपूर्ति की
जाती है। उक्त नोडल जन पदों से सम्बन्धित जनपदों के कोषागारों को स्टाम्प की आपूर्ति
की जाती है। समस्त अभिदान के स्टाम्प पत्रों की आपूर्ति कानपुर नगर कोषागार को नासिक
रोड प्रेस तथा शाखा हैदराबाद से की जाती है। उपरोक्त अन्य दस नोडल बिन्दु कोषागार
अपनी त्रैमासिक आवश्यकतानुसार स्टाम्पों को कानपुर नगर कोषागार से प्राप्त करते हैं।
जनपद के कोषागार से स्टाम्प पत्रों को पुनः उपकोषागार, स्टाम्प विक्रेताओं एवं इच्छुक
क्रेतागण को मूल्य लेकर दिया जाता है।
स्टाम्प की मांगपत्र नियमानुसार त्रैमासिक अवधि हेतु प्रेषित की जाती है जो
राजस्व-परिषद कार्यालय इलाहाबाद में निर्धारित अंतिम अवधि तक अवश्य पहुॅच जाना
चाहिए। उत्तर प्रदेश परिषद द्वारा उक्त नोडल बिन्दु कोषागारों से प्राप्त त्रैमासिक मांग
पत्रों को संकलित कर केन्द्रीय मुद्रांक डिपो नासिक रोड निर्धारित अंतिम तिथि से पूर्व
मूलरूप में अग्रसारित कर उपलब्ध कराने हेतु भेज दिया जाता है।
(ड़) अनुपयुक्त अथवा नष्ट हुए स्टाम्प पत्रों की वापसी: भारतीय स्टाम्प-
अधिनियम, 1899 की धारा 49 से 55 तक तथा उ0प्र0 स्टाम्प स्टाम्प नियमावली 1942
के नियम 218 से 243 तक अनुपयुक्त अथवा नष्ट हुए स्टाम्प पत्रों की धनराशि की
वापसी का प्रविधान अंकित है।
यदि किसी लेखपत्र आदि तैयार करने हेतु स्टाम्प पत्र खरीदे गये हैं किन्तु
किसी कारणवश उक्त स्टाम्प पत्रों का उपयोग नहीं किया जा सका है या उक्त स्टाम्प पत्र
किसी कारणवश खराब हो गये हैं तो उन्हें जिलाधिकारी कार्यालय में निर्धारित अवधि में
वापसी के प्रार्थना पत्र सहित स्टाम्प पत्र जमा कराकर आवश्यक शुल्क की कटौती के पश्चात्
स्टाम्प पत्रों के क्रेता को नियमानुसार धनराशि वापस प्राप्त की जा सकती है। किन्हीं विशेष
परिस्थितियों में यह प्रार्थनापत्र देने की अवधि जिलाधिकारी द्वारा दो वर्ष तक बढ़ाई जा
सकती है, किन्तु अप्रयुक्त/खराब स्टाम्पों की धनराशि की वापसी की अवधि बढ़ाने हेतु शासन
की अनुमति प्राप्त करना आवश्यक है।