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स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग, उत्तर प्रदेश

किरायानामा डिजिटल स्टाम्पिंग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) — आम नागरिकों के लिए
अब 12 माह तक के किरायानामे का स्टाम्पिंग घर बैठे, बिना किसी कार्यालय जाए, पूरी तरह ऑनलाइन और नि:शुल्क प्रक्रिया से करें। आधार और ई-साइन से सुरक्षित एवं मान्य दस्तावेज़ तैयार करें।
सामान्य प्रश्न एवं उत्तर
1
किरायानामा (Rent Agreement) क्या होता है और इसकी ज़रूरत क्यों है?

किरायानामा एक कानूनी दस्तावेज़ है जो मकान मालिक (किरायादाता) और किराएदार (किरायाग्रहिता) के बीच किराये की शर्तों को लिखित रूप में निर्धारित करता है। इसमें किराये की राशि, अवधि, जमानत राशि आदि का उल्लेख होता है।

⚠️ भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 35 के अनुसार, यदि किरायानामे पर उचित स्टाम्प शुल्क नहीं चुकाया गया, तो वह न्यायालय में साक्ष्य के रूप में मान्य नहीं होगा।

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क्या 12 माह तक के किरायानामे का पंजीकरण (Registration) अनिवार्य है?

नहीं। रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 की धारा 18(ग) के अनुसार 12 माह (एक वर्ष) तक की अवधि के किरायानामे का पंजीकरण ऐच्छिक (वैकल्पिक) है। इसलिए आप बिना निबंधन कार्यालय जाए, केवल डिजिटल स्टाम्पिंग करके वैध किरायानामा तैयार कर सकते हैं।

12 माह से अधिक अवधि के किरायानामे के लिए पंजीकरण अनिवार्य है।

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यह नई ऑनलाइन सुविधा क्या है और इससे क्या लाभ है?

स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग, उत्तर प्रदेश ने एक पूर्णतः ऑनलाइन, फेसलेस (Faceless) पोर्टल तैयार किया है। इसके प्रमुख लाभ हैं:

  • 🏠 घर बैठे, बिना कार्यालय जाए किरायानामा बनाएँ
  • 🕐 24×7 उपलब्ध – कभी भी, कहीं से भी
  • 🔒 आधार ई-केवाईसी से सुरक्षित पहचान सत्यापन
  • ✍️ आधार ई-हस्ताक्षर से कानूनी रूप से मान्य निष्पादन
  • 💰 सॉफ्टवेयर द्वारा स्वचालित स्टाम्प शुल्क गणना
  • 📄 डिजिटल रूप में सुरक्षित संधारण एवं प्रिंटआउट सुविधा
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इस पोर्टल पर किरायानामा बनाने की प्रक्रिया क्या है?

पोर्टल पर किरायानामा बनाने की प्रक्रिया सरल चरणों में इस प्रकार है:

1
विभागीय पोर्टल पर लॉगिन करें और "12 माह तक के किरायानामे की डिजिटल स्टाम्पिंग" विकल्प चुनें।
2
किरायादाता और किरायाग्रहिता दोनों के आधार विवरण दर्ज करें।
3
आधार ई-केवाईसी के माध्यम से दोनों पक्षों की पहचान सत्यापित करें।
4
किराये की अवधि, मासिक किराया, प्रीमियम एवं अन्य विवरण भरें — स्टाम्प शुल्क स्वतः गणना होगी।
5
किरायानामे का प्रारूप स्वतः तैयार होगा; ऑनलाइन स्टाम्प शुल्क भुगतान करें।
6
दोनों पक्ष आधार ई-हस्ताक्षर से दस्तावेज़ निष्पादित करें।
7
प्रिंटआउट लें एवं ई-मेल / पंजीकृत लॉगिन पर दस्तावेज़ प्राप्त करें।
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ई-केवाईसी (e-KYC) और ई-हस्ताक्षर (e-Sign) क्या होते हैं?

ई-केवाईसी (e-KYC): आधार से जुड़ी डिजिटल पहचान सत्यापन प्रक्रिया है, जिसमें OTP के माध्यम से आपकी पहचान की पुष्टि होती है। इसके लिए आधार से मोबाइल नंबर लिंक होना आवश्यक है।

ई-हस्ताक्षर (e-Sign): यह एक डिजिटल हस्ताक्षर है जो आधार OTP के माध्यम से किया जाता है। यह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के अंतर्गत कानूनी रूप से मान्य है।

📱 ई-केवाईसी और ई-हस्ताक्षर के लिए आधार से पंजीकृत मोबाइल नंबर पर OTP आएगा।

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स्टाम्प शुल्क (Stamp Duty) क्या होता है और इसे कैसे चुकाएँ?

स्टाम्प शुल्क वह कर है जो सरकार द्वारा कानूनी दस्तावेजों पर लगाया जाता है। किरायानामे के लिए यह किराये की राशि, अवधि और प्रीमियम के आधार पर तय होता है।

इस पोर्टल पर आपको स्टाम्प शुल्क की गणना स्वयं नहीं करनी होगी — सॉफ्टवेयर स्वतः गणना करेगा। इसके बाद भुगतान ऑनलाइन माध्यम (डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग, UPI आदि) से किया जा सकता है।

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क्या डिजिटल स्टाम्पिंग से बना किरायानामा कानूनी रूप से मान्य होगा?

हाँ। इस पोर्टल से तैयार किरायानामा पूरी तरह कानूनी रूप से मान्य होगा क्योंकि:

  • उचित स्टाम्प शुल्क का भुगतान किया जाएगा
  • आधार ई-हस्ताक्षर IT अधिनियम के तहत वैधानिक हैं
  • दस्तावेज़ विभाग के सर्वर पर सुरक्षित संधारित होगा
  • यह न्यायालय में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सकेगा
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निष्पादित किरायानामा कहाँ से प्राप्त होगा? क्या यह सुरक्षित रहेगा?

निष्पादित एवं डिजिटल रूप से स्टाम्पित किरायानामा निम्नलिखित तरीकों से उपलब्ध होगा:

  • 📥 तुरंत प्रिंटआउट लिया जा सकता है
  • 📧 पंजीकृत ई-मेल पर भेजा जाएगा
  • 🔐 आवेदक के पंजीकृत लॉगिन पर सुरक्षित रूप से सदैव उपलब्ध रहेगा
🛡️ दस्तावेज़ विभाग के सुरक्षित सर्वर पर संधारित रहेगा, जिसे भविष्य में कभी भी डाउनलोड किया जा सकता है।
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इस सेवा का उपयोग करने के लिए क्या-क्या आवश्यक है?

इस सेवा का लाभ उठाने के लिए निम्नलिखित की आवश्यकता होगी:

  • 🪪 दोनों पक्षों का आधार नंबर (किरायादाता एवं किरायाग्रहिता)
  • 📱 आधार से लिंक मोबाइल नंबर (OTP प्राप्त करने के लिए)
  • 🌐 इंटरनेट कनेक्शन एवं स्मार्टफोन / कंप्यूटर
  • 📧 ई-मेल आईडी (दस्तावेज़ प्राप्ति हेतु)
  • 💳 ऑनलाइन भुगतान की सुविधा (UPI / डेबिट कार्ड / नेट बैंकिंग)
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यदि स्टाम्प शुल्क न चुकाया जाए तो क्या होगा?

भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 35 के अनुसार, यदि किरायानामे पर उचित स्टाम्प शुल्क नहीं चुकाया गया है तो:

  • ❌ उसे किसी भी न्यायालय में साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा
  • ❌ किसी भी सरकारी अधिकारी के समक्ष वह दस्तावेज़ मान्य नहीं होगा
  • ❌ विवाद की स्थिति में कोई कानूनी सुरक्षा उपलब्ध नहीं होगी
💡 इस पोर्टल के माध्यम से स्टाम्प शुल्क स्वतः गणना होने से ऐसी समस्या नहीं होगी।
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क्या इस पोर्टल पर दोनों पक्षों का एक ही स्थान पर होना ज़रूरी है?

नहीं। यह पोर्टल पूर्णतः फेसलेस (Faceless) है। किरायादाता और किरायाग्रहिता अलग-अलग स्थानों से अपने-अपने आधार ई-हस्ताक्षर कर सकते हैं। दोनों को एक साथ या एक ही स्थान पर उपस्थित होने की कोई आवश्यकता नहीं है। ✅ पूरी तरह ऑनलाइन — कहीं भी, कभी भी

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इस डिजिटल पहल से सरकार और नागरिकों को क्या समग्र लाभ होगा?

यह पहल सुशासन और ईज़ ऑफ लिविंग (Ease of Living) को बढ़ावा देती है:

  • 🏛️ सरकार को — उचित राजस्व की प्राप्ति, दस्तावेज़ों का डिजिटल अभिलेख
  • 👨‍👩‍👧 नागरिकों को — समय, धन और श्रम की बचत; पारदर्शी सेवाएँ
  • 📊 प्रशासन को — ऑनलाइन अभिलेख प्रबंधन, भ्रष्टाचार में कमी
  • 🔏 सभी के लिए — सुरक्षित, प्रामाणिक एवं कभी न खोने वाले दस्तावेज़