किरायानामा एक कानूनी दस्तावेज़ है जो मकान मालिक (किरायादाता) और किराएदार (किरायाग्रहिता) के बीच किराये की शर्तों को लिखित रूप में निर्धारित करता है। इसमें किराये की राशि, अवधि, जमानत राशि आदि का उल्लेख होता है।
नहीं। रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 की धारा 18(ग) के अनुसार 12 माह (एक वर्ष) तक की अवधि के किरायानामे का पंजीकरण ऐच्छिक (वैकल्पिक) है। इसलिए आप बिना निबंधन कार्यालय जाए, केवल डिजिटल स्टाम्पिंग करके वैध किरायानामा तैयार कर सकते हैं।
स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग, उत्तर प्रदेश ने एक पूर्णतः ऑनलाइन, फेसलेस (Faceless) पोर्टल तैयार किया है। इसके प्रमुख लाभ हैं:
पोर्टल पर किरायानामा बनाने की प्रक्रिया सरल चरणों में इस प्रकार है:
ई-केवाईसी (e-KYC): आधार से जुड़ी डिजिटल पहचान सत्यापन प्रक्रिया है, जिसमें OTP के माध्यम से आपकी पहचान की पुष्टि होती है। इसके लिए आधार से मोबाइल नंबर लिंक होना आवश्यक है।
ई-हस्ताक्षर (e-Sign): यह एक डिजिटल हस्ताक्षर है जो आधार OTP के माध्यम से किया जाता है। यह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के अंतर्गत कानूनी रूप से मान्य है।
स्टाम्प शुल्क वह कर है जो सरकार द्वारा कानूनी दस्तावेजों पर लगाया जाता है। किरायानामे के लिए यह किराये की राशि, अवधि और प्रीमियम के आधार पर तय होता है।
इस पोर्टल पर आपको स्टाम्प शुल्क की गणना स्वयं नहीं करनी होगी — सॉफ्टवेयर स्वतः गणना करेगा। इसके बाद भुगतान ऑनलाइन माध्यम (डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग, UPI आदि) से किया जा सकता है।
हाँ। इस पोर्टल से तैयार किरायानामा पूरी तरह कानूनी रूप से मान्य होगा क्योंकि:
निष्पादित एवं डिजिटल रूप से स्टाम्पित किरायानामा निम्नलिखित तरीकों से उपलब्ध होगा:
इस सेवा का लाभ उठाने के लिए निम्नलिखित की आवश्यकता होगी:
भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 35 के अनुसार, यदि किरायानामे पर उचित स्टाम्प शुल्क नहीं चुकाया गया है तो:
नहीं। यह पोर्टल पूर्णतः फेसलेस (Faceless) है। किरायादाता और किरायाग्रहिता अलग-अलग स्थानों से अपने-अपने आधार ई-हस्ताक्षर कर सकते हैं। दोनों को एक साथ या एक ही स्थान पर उपस्थित होने की कोई आवश्यकता नहीं है। ✅ पूरी तरह ऑनलाइन — कहीं भी, कभी भी
यह पहल सुशासन और ईज़ ऑफ लिविंग (Ease of Living) को बढ़ावा देती है: